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जीवन को मात्र दीर्घायु कर देना पर्याप्त नहीं, जीवन को गुणात्मक रूप से संतुष्ट और समृद्ध होना चाहिए: उपराष्ट्रपति

उपराष्ट्रपति श्री एम वेंकैया नायडू ने आज कहा कि यदि देश को एक समन्वेशी और सतत विकास के मार्ग पर बढ़ना है और विश्व समुदाय में अपना अभीष्ट अग्रणी स्थान प्राप्त करना है तो आवश्यक है कि हम  विश्वास और जोश से भरी अपनी विशाल युवा जनसंख्या को स्वस्थ रखें। Via Press Information Bureau http://www.pib.nic.in

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